
बिहार में बच्चों के कुपोषण को दूर करने, मातृ स्वास्थ्य में सुधार और ग्रामीण स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा की नींव रखने में ‘समेकित बाल विकास सेवा’ (ICDS) की भूमिका अद्वितीय है। बिहार सरकार का समाज कल्याण विभाग वर्तमान में राज्य के लाखों बच्चों और महिलाओं तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के एक विशाल नेटवर्क का संचालन कर रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!वर्ष 2026 के लिए बिहार आंगनवाड़ी भर्ती की घोषणा हो चुकी है, जिसके तहत लगभग 20,000 से अधिक सेविका और सहायिका के रिक्त पदों पर बम्पर बहाली होने की संभावना है。 इसके साथ ही, बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के माध्यम से स्नातक पास महिलाओं के लिए महिला पर्यवेक्षिका (Lady Supervisor) के पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
यह रिपोर्ट बिहार के अभ्यर्थियों के लिए एक विस्तृत गाइड है, जिसमें 1000+ शब्दों का गहन सिलेबस, नई वेतन वृद्धि, तैयारी की रणनीति, और उन प्रेरणादायक कहानियों को शामिल किया गया है जो आपको इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगी।
बिहार आंगनवाड़ी भर्ती 2026: मुख्य विवरण (Overview)
बिहार में आंगनवाड़ी भर्ती की प्रक्रिया काफी पारदर्शी है। जहाँ जमीनी स्तर (सेविका/सहायिका) पर चयन सीधे मेधा सूची (Merit List) के आधार पर होता है, वहीं सुपरवाइजर जैसे पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है।
| पैरामीटर | भर्ती विवरण (Bihar Recruitment Details) |
|---|---|
| प्रशासकीय निकाय | समाज कल्याण विभाग, ICDS बिहार |
| पद का नाम | आंगनवाड़ी सेविका, सहायिका, महिला पर्यवेक्षिका (Supervisor) |
| कुल रिक्तियां | 20,000+ (सेविका/सहायिका के लिए संभावित) |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन (fts.bih.nic.in) |
| चयन प्रक्रिया | सेविका/सहायिका: सीधे मेधा सूची; सुपरवाइजर: लिखित परीक्षा |
| लक्ष्य अभ्यर्थी | केवल बिहार की मूल निवासी महिला उम्मीदवार |
पात्रता मानदंड 2026 (Comprehensive Eligibility Criteria)
बिहार सरकार ने हाल ही में आंगनवाड़ी कर्मियों की शैक्षणिक योग्यता और चयन नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं ताकि गुणवत्ता में सुधार हो सके。
- शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification):
- आंगनवाड़ी सहायिका (Helper): उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 10वीं (मैट्रिक) पास होना अनिवार्य है。
- आंगनवाड़ी सेविका (Worker): नए नियमों के अनुसार, सेविका पद के लिए अब 12वीं (इंटरमीडिएट) पास होना अनिवार्य कर दिया गया है。
- महिला पर्यवेक्षिका (Supervisor): इस पद के लिए अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होनी चाहिए। समाजशास्त्र, गृह विज्ञान या मनोविज्ञान विषय के स्नातकों को अक्सर प्राथमिकता दी जाती है。
- आयु सीमा (Age Limit): आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 35 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणियों (SC/ST/EBC/BC) की महिलाओं को बिहार सरकार के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी。
- स्थानीय निवास (Residency): सेविका और सहायिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक को उसी वार्ड का स्थाई निवासी होना चाहिए जहाँ रिक्ति निकली है。 इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ‘निवास प्रमाण पत्र’ (आवास प्रमाण पत्र) अनिवार्य है।
🛑 बिहार महिला पर्यवेक्षिका (Supervisor) परीक्षा 2026 के लिए विस्तृत सिलेबस (In-Depth Syllabus Analysis) 🛑
बिहार लेडी सुपरवाइजर की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए सिलेबस के हर छोटे-बड़े बिंदु को समझना आवश्यक है। एक सुपरवाइजर का काम 25 से 30 आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी करना, कुपोषण के आंकड़ों का विश्लेषण करना और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना है। इसलिए, परीक्षा का पाठ्यक्रम काफी व्यापक है, जो अभ्यर्थी की तार्किक क्षमता, सामान्य ज्ञान और विषय-विशेष (पोषण एवं बाल विकास) की गहराई को मापता है。
यहाँ 1000 से अधिक शब्दों में सिलेबस का वह सूक्ष्म विश्लेषण दिया जा रहा है, जिसे मास्टर करके आप परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त कर सकती हैं।
खंड 1: पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता (Nutrition and Health – अत्यंत महत्वपूर्ण)
यह सुपरवाइजर परीक्षा का सबसे तकनीकी हिस्सा है। चूँकि आंगनवाड़ी का मुख्य उद्देश्य कुपोषण मिटाना है, इसलिए यहाँ से सर्वाधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
- पोषक तत्वों का वर्गीकरण (Classification of Nutrients): मुख्य पोषक तत्व (Macronutrients) जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के जैविक कार्य, ऊर्जा मूल्य और उनके स्रोत। सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) के रूप में विटामिन (A, B-complex, C, D, E, K) और खनिज लवण (आयोडीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम) की भूमिका।
- कुपोषण और कमी से होने वाले रोग (Deficiency Diseases): प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण (PEM) के अंतर्गत कवाशियोरकर (Kwashiorkor) और मरास्मस (Marasmus) के लक्षण और उपचार। विटामिन की कमी से होने वाले रोग जैसे रतौंधी (Night Blindness), स्कर्वी, रिकेट्स, बेरी-बेरी और एनीमिया (रक्तहीनता)। विशेष रूप से बिहार में ग्रामीण बच्चों और किशोरियों में एनीमिया के उच्च स्तर को देखते हुए आयरन और फोलिक एसिड (IFA) पूरकता पर गहन प्रश्न पूछे जाते हैं。
- ग्रोथ मॉनिटरिंग (वृद्धि निगरानी): बच्चों के वजन और ऊंचाई को मापने की तकनीक। WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के ग्रोथ चार्ट्स को समझना और उनका उपयोग करना। बच्चे के वजन और उम्र के अनुपात को ग्राफ पर दर्शाना और ‘स्टंटिंग’ (नाटापन) व ‘वेस्टिंग’ (सूखापन) की पहचान करना।
- मातृ पोषण और ‘प्रथम 1000 दिन’: गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता। बच्चे के जन्म से लेकर 2 वर्ष तक की आयु के ‘प्रथम 1000 दिन’ का वैज्ञानिक महत्व। कोलोस्ट्रम (मुर्गा दूध) का महत्व, 6 माह तक केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) और उसके बाद पूरक आहार (Weaning) शुरू करने की सही विधि।
खंड 2: बाल विकास और मनोविज्ञान (Child Development and Psychology)
सुपरवाइजर को बच्चों के व्यवहार और उनके मानसिक विकास को समझना होता है ताकि वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रशिक्षण दे सकें।
- विकास की अवस्थाएं (Stages of Development): प्रसव पूर्व (Prenatal) से लेकर किशोरावस्था तक शारीरिक, संज्ञानात्मक (Cognitive), सामाजिक और भावनात्मक विकास के पड़ाव। प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांत, जैसे जीन पियाजे (Jean Piaget) का संज्ञानात्मक विकास और लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत。
- प्रारंभिक बाल्यकाल देखभाल और शिक्षा (ECCE): 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ‘खेल-खेल में शिक्षा’ (Play-way methods) का महत्व। बच्चों में सूक्ष्म और स्थूल मोटर कौशल (Motor Skills) का विकास करना। स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर कम लागत वाली शिक्षण सामग्री (TLM) तैयार करना。
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Children with Special Needs): दिव्यांगता के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना।
खंड 3: सामान्य ज्ञान और बिहार विशेष जागरूकता (General Studies & Bihar GK)
इस खंड में अभ्यर्थी की वैश्विक और क्षेत्रीय जागरूकता का परीक्षण होता है।
- बिहार का भूगोल और इतिहास: बिहार की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख नदियाँ (गंगा, कोसी, गंडक), जलवायु और कृषि पद्धतियाँ। बिहार के गौरवशाली इतिहास में बुद्ध, महावीर, सम्राट अशोक और शेरशाह सूरी की भूमिका। आधुनिक बिहार का निर्माण, 1857 की क्रांति में वीर कुंवर सिंह का योगदान और चंपारण सत्याग्रह। बिहार के प्रमुख लोक नृत्य (जैसे जट-जटिन, बिदेसिया), मेले (सोनपुर मेला) और त्योहार (छठ पूजा)।
- भारतीय संविधान और राजनीति: संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP)। भारत का संसदीय ढांचा। पंचायती राज व्यवस्था (73वां संशोधन): चूँकि आंगनवाड़ी केंद्र ग्राम पंचायत के साथ मिलकर काम करते हैं, इसलिए मुखिया, वार्ड सदस्य और ग्राम सभा की शक्तियों के बारे में गहराई से जानना अनिवार्य है。
- सामयिक घटनाक्रम (Current Affairs): पिछले 12 महीनों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें। खेल, पुरस्कार, नई नियुक्तियाँ और विशेष रूप से बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई नई योजनाएं。
खंड 4: महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाएं (Schemes and Policies)
एक सुपरवाइजर को सभी कल्याणकारी योजनाओं की रत्ती-रत्ती जानकारी होनी चाहिए ताकि वे लाभार्थियों को इसका लाभ दिला सकें।
- प्रमुख केंद्र प्रायोजित योजनाएं: पोषण अभियान 2.0 (POSHAN Abhiyaan), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY – पहली बार गर्भवती होने पर ₹5000 की सहायता), मिशन वात्सल्य, मिशन शक्ति और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ。
- बिहार राज्य की विशेष योजनाएं: मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (जन्म से स्नातक तक आर्थिक सहायता), मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना, सात निश्चय योजना, जल-जीवन-हरियाली अभियान और जीविका समूह (SHGs) की कार्यप्रणाली。
- कानूनी प्रावधान: दहेज निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (POSH Act) की जानकारी。
खंड 5: सामान्य गणित और तार्किक क्षमता (Maths and Reasoning)
डाटा एंट्री, स्टॉक रजिस्टर के मिलान और बजट प्रबंधन के लिए बुनियादी गणित आवश्यक है।
- अंकगणित (Arithmetic): संख्या पद्धति, लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) और महत्तम समापवर्तक (HCF)। प्रतिशत (Percentage), लाभ और हानि, औसत (Average), साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज। समय और कार्य, समय और दूरी。
- तर्कशक्ति (Reasoning): कोडिंग-डिकोडिंग, रक्त संबंध (Blood Relations), दिशा परीक्षण, श्रेणी (Series) पूर्ण करना, सादृश्यता (Analogy) और वेन आरेख (Venn Diagrams)。
चयन प्रक्रिया और परीक्षा का पैटर्न (Exam Pattern)
बिहार आंगनवाड़ी भर्ती 2026 की चयन प्रक्रिया पद के अनुसार भिन्न होती है:
1. सेविका और सहायिका के लिए: इन पदों के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होती। मेधा सूची (Merit List) पूरी तरह से 10वीं और 12वीं में प्राप्त अंकों के प्रतिशत के आधार पर बनाई जाती है。 मेधा सूची प्रकाशन के बाद संबंधित प्रखंड (Block) के CDPO कार्यालय में मूल दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
2. महिला पर्यवेक्षिका (Supervisor) के लिए: इसका चयन BSSC (बिहार कर्मचारी चयन आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से होता है。
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट होता है जिसमें 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूछे जाते हैं। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक मिलते हैं और गलत उत्तर पर 1 अंक की कटौती होती है。
- मुख्य परीक्षा (Mains): इसमें दो पेपर होते हैं। पेपर 1 (सामान्य हिंदी – क्वालीफाइंग) और पेपर 2 (सामान्य अध्ययन, गणित, विज्ञान और विषय-ज्ञान – मेरिट के लिए)。
तैयारी की रणनीति और डेली टाइम टेबल (Strategy & Timetable)
बिहार जैसे उच्च प्रतिस्पर्धा वाले राज्य में सफलता पाने के लिए एक अनुशासित दिनचर्या अनिवार्य है।
- रणनीति:
- पोषण और बाल विकास पर ध्यान दें: पर्यवेक्षिका परीक्षा में इस विषय का भार लगभग 40-50% होता है। इसके लिए गृह विज्ञान की कक्षा 11-12 की NCERT किताबों को अच्छी तरह पढ़ें।
- करेंट अफेयर्स: बिहार की सरकारी वेबसाइटों (जैसे ICDS Bihar और समाज कल्याण विभाग) पर रोज नज़र रखें ताकि नई योजनाओं की जानकारी रहे।
- मॉक टेस्ट: कम से कम 50 पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें ताकि 135 मिनट में 150 प्रश्न हल करने की गति बन सके。
- आदर्श टाइम टेबल:
- सुबह 6:00 – 8:00: गणित और विज्ञान का अभ्यास (दिमाग ताज़ा होने पर कठिन विषय पढ़ें)।
- सुबह 10:00 – 12:00: पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास (विषय-विशेष की पढ़ाई)।
- शाम 4:00 – 6:00: रीजनिंग और सामान्य हिंदी का अभ्यास।
- रात 8:00 – 10:00: पूरे दिन का रिवीज़न और बिहार करेंट अफेयर्स पढ़ना।
अनुशंसित पुस्तकें (Recommended Books – Hindi Medium)
बिहार के अभ्यर्थियों के लिए हिंदी माध्यम में उपलब्ध सर्वोत्तम पुस्तकों की सूची यहाँ दी गई है:
| विषय | पुस्तक का नाम (Recommended Books) | लेखक / प्रकाशक |
|---|---|---|
| सुपरवाइजर गाइड | बिहार आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिका मास्टर गाइड | चक्षु (Chakshu) / उपकार |
| सामान्य ज्ञान | लुसेंट सामान्य ज्ञान (हिंदी माध्यम) | लुसेंट पब्लिकेशन्स |
| विषय-विशेष | पोषण एवं बाल विकास विशेष बुक | विन्नर्स पब्लिकेशन (Winners) |
| रीजनिंग | आधुनिक तर्कशक्ति परीक्षण | आर.एस. अग्रवाल |
| बिहार विशेष | बिहार एक परिचय | इम्तियाज अहमद / मनीष रंजन (IAS) |
बिहार आंगनवाड़ी वेतन संरचना 2026 (Bihar Anganwadi Salary)
बिहार सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में एक ऐतिहासिक वृद्धि को मंजूरी दी है。
| पद का नाम | पुराना मानदेय | नया मानदेय (2026) | अतिरिक्त लाभ |
|---|---|---|---|
| आंगनवाड़ी सेविका | ₹7,000 | ₹9,000 प्रति माह | स्मार्टफोन, डेटा भत्ता |
| आंगनवाड़ी सहायिका | ₹4,000 | ₹4,500 प्रति माह | ड्रेस भत्ता |
| महिला पर्यवेक्षिका | – | ₹30,000 – ₹35,000 | भत्ते और पेंशन (नियमित पद) |
यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है。 इसके अलावा, सेविकाओं को अब समय पर मानदेय भुगतान के लिए PFMS और DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में राशि भेजी जाती है।
जॉब प्रोफाइल की तुलना: सेविका बनाम आशा बनाम शिक्षक
बिहार के ग्रामीण विकास में इन तीन स्तंभों की भूमिका अलग-अलग है:
- आंगनवाड़ी सेविका (WCD विभाग): यह एक केंद्र-आधारित नौकरी है। मुख्य काम बच्चों को पोषण देना, ग्रोथ चार्ट बनाना और प्री-स्कूल शिक्षा देना है। यह एक ‘मानदेय’ आधारित पद है।
- आशा कार्यकर्ता (स्वास्थ्य विभाग): यह एक फील्ड-आधारित पद है। मुख्य काम संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) को बढ़ावा देना और टीकाकरण है। इनकी आय ‘काम-आधारित प्रोत्साहन’ (Incentives) पर निर्भर करती है。
- प्राथमिक शिक्षक (शिक्षा विभाग): ये नियमित सरकारी कर्मचारी होते हैं, जिन्हें पूर्ण वेतनमान, पेंशन और छुट्टियाँ मिलती हैं 。
विभागीय पदोन्नति के नियम (Departmental Promotion Hierarchy)
बिहार में एक सहायिका के लिए सेविका बनने और एक सेविका के लिए सुपरवाइजर बनने के रास्ते कानूनी रूप से खुले हैं。
- सहायिका से सेविका: कुल खाली पदों में से 50% पद उन सहायिकाओं के लिए आरक्षित होते हैं जिन्होंने 5 साल की सेवा पूरी कर ली है और जिनके पास 12वीं पास की योग्यता है。
- सेविका से महिला पर्यवेक्षिका: 50% महिला पर्यवेक्षिका के पदों को ‘सीमित विभागीय परीक्षा’ के माध्यम से योग्य सेविकाओं द्वारा भरा जाता है。 इसके लिए सेविका के पास स्नातक की डिग्री और 10 साल का अनुभव होना चाहिए।
प्रेरणादायक सफलता की कहानियाँ (Success Stories)
बिहार की आंगनवाड़ी व्यवस्था ने कई ऐसे हीरे दिए हैं जिन्होंने दुनिया में नाम कमाया है।
- आंगनवाड़ी सेविका की बेटी बनी IAS: जमुई जिले की रागिनी कुमारी की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनकी माँ एक आंगनवाड़ी सेविका थीं। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद रागिनी ने खुद की मेहनत और माँ के प्रोत्साहन से बीपीएससी (BPSC) की परीक्षा में सफलता पाई और आज वह राज्य में अधिकारी (BDO) के पद पर कार्यरत हैं。
- 2.5 करोड़ का पैकेज (लखीसराय): बिहार के लखीसराय जिले के अतुल कुमार, जिनकी माँ आंगनवाड़ी सेविका हैं, ने हाल ही में अमेरिका की एक बड़ी कंपनी में ₹2.5 करोड़ का सालाना पैकेज हासिल करके इतिहास रच दिया। यह साबित करता है कि आंगनवाड़ी कर्मियों का संघर्ष उनके बच्चों के लिए सफलता की सीढ़ी बनता है。
- सेविका से IAS बनी मनीषा धारवे: एक आदिवासी समाज से ताल्लुक रखने वाली मनीषा पहले आंगनवाड़ी सेविका थीं। उन्होंने काम के साथ-साथ UPSC की तैयारी की और चौथे प्रयास में 257वीं रैंक हासिल कर IAS अफसर बनीं。
शीर्ष 10 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Top 10 FAQs)
Q1: बिहार आंगनवाड़ी भर्ती 2026 का विज्ञापन कब आएगा? समाज कल्याण विभाग, बिहार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना मार्च-अप्रैल 2026 तक जारी होने की उम्मीद है। अभ्यर्थियों को ICDS बिहार की आधिकारिक वेबसाइट fts.bih.nic.in पर नजर रखनी चाहिए。
Q2: क्या सेविका पद के लिए कोई परीक्षा देनी होगी? नहीं, सेविका और सहायिका पदों के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होती है। चयन पूरी तरह से 10वीं और 12वीं के अंकों के आधार पर ‘मेधा सूची’ के जरिए होता है。
Q3: बिहार में सेविका का नया वेतन कितना है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के अनुसार, सेविका का मानदेय अब ₹7,000 से बढ़कर ₹9,000 प्रति माह कर दिया गया है。
Q4: क्या विवाहित होना अनिवार्य है? हाँ, सेविका और सहायिका के पदों के लिए संबंधित वार्ड की निवासी ‘शादीशुदा’ महिला को प्राथमिकता दी जाती है। अविवाहित लड़कियों को आमतौर पर इन पदों पर नहीं रखा जाता है।
Q5: पर्यवेक्षिका (Supervisor) परीक्षा के लिए कौन पात्र है? ऐसी महिला उम्मीदवार जिन्होंने किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) पूरा किया है और जिनकी आयु 18-40 वर्ष के बीच है, वे आवेदन कर सकती हैं。
Q6: क्या बिहार में पुरुषों के लिए भी कोई पद है? नहीं, आंगनवाड़ी केंद्र की सभी नियुक्तियां (सेविका, सहायिका, सहायिका) विशेष रूप से केवल महिलाओं के लिए हैं。
Q7: आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? 10वीं/12वीं की मार्कशीट, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और विधवा/दिव्यांग (यदि लागू हो) का प्रमाण पत्र。
Q8: ‘प्रथम 1000 दिन’ का सिलेबस में क्या महत्व है? यह सुपरवाइजर परीक्षा का मुख्य विषय है। इसमें बच्चे के गर्भधारण से लेकर 2 साल की उम्र तक के पोषण और मस्तिष्क विकास के बारे में गहन जानकारी पूछी जाती है。
Q9: क्या विभागीय पदोन्नति का लाभ मिलता है? हाँ, 50% पर्यवेक्षिका पद अनुभवी सेविकाओं के लिए आरक्षित होते हैं जिन्होंने ग्रेजुएशन कर लिया है और 5-10 साल की सेवा पूरी कर ली है。
Q10: बिहार आंगनवाड़ी केंद्रों का समय क्या है? आमतौर पर केंद्र सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में सरकार समय बदलकर सुबह 7:00 से 11:30 बजे तक कर देती है。